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दो कविताएं
सागर त्रिवेदी
गोते
सबसे बड़ा अभिशाप है
अपने समय में बंद होकर जीना
एड़ी उचका कर
ठुड्ढी खिड़की की सिल्ली से टिका कर बेचैन
खोजना बाहर किसी और युग का संकेत
जब आसमान भी शीशे सा दिखाए
मात्र प्रतिविम्ब
नित्य घर के ही आंगन...