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तीन कविताएं
बिपिन पांडे
-बिपिन पांडे
चाँद की ख़ामोशी
चाँद खामोश क्यूँ है इतना,
क्या वो सागर की लहरों में खो गया है ?
काश! कोई बदल आ जाता, दोनों के बीच में,
और मुझे मेरे चाँद की आवाज़ मिल जाती |बादल भी क्या आया,आते ही बरस गया,
वो भी चाँद के...