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बीच की धूप [[उपन्यास] :हवा के ताज़े झोंके की तरह…

पुस्तक समीक्षा: बीच की धूप [उपन्यास] हवा के ताज़े झोंके की तरह… जीतेंद्र वर्मा महीप सिंह हिंदी के उन थोड़े लेखकों में एक हैं जो शुरू से जातिगत और धार्मिक उत्पीड़न जैसे सवालों से सवालों से टकराते रहें हैं. हिंदी साहित्य में... 
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