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दो कवितायेँ
वरुण पासवान
पटना में गंगा
पड़ी हुई है एक किनारे पर
होगी कोई नदी
कोई विस्तार पानी का
अपनी बैठक का कोई झोलदार कोना महज
जहाँ भटक के ना पहुंचा कोई मेहमान
ना ही टिका कोई मेज़बान
दूरियां पार करने को एक पुल है
उसके नीचे...