Home » हिन्दी, Current, Poetry Corner » एक गांव पर संकट है, सारे गांव इकट्ठा हों

एक गांव पर संकट है, सारे गांव इकट्ठा हों

एक गांव पर संकट है

सारे गांव इकट्ठा हों

कवि एक राष्ट्रीय चैनल में मीडियाकर्मी है, और अनामदास के नाम से लिखते है.

एक गांव पर संकट है !!!

पानी डूबा फाईल में – गाड़ी में – मोबाईल में

सारे वादे डूब गए – खून स‌ने मसाइल में

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

स‌च तो बिका तरक्की में, वादों की भट्टी में

पिस‌ती सारी जनता है, हर स‌रकारी चक्की में

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

इस धरती पर संकट है, इस अंबर पर संकट है

हर शब्द पर संकट है, हर अर्थ पर संकट है

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

गांवो में सुनसानी है – बैठी बूढ़ी नानी है

स‌ारे नौजवान परदेस गये – ना रोजी है ना पानी है

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

नदी को बहता पानी दो, हर कबीर को वाणी दो

सिसकी वाली रातों को – सूरज वाली कहानी दो

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

खेत सभी प्यासे हैं – बस आंखों में ही पानी है

कौन लड़ेगा इस संकट से – चिंता है, हैरानी है

सारे गांव इकट्ठा हों – एक गांव पर संकट है

क्या हम कुछ कर पायेँगे – मन में घोर निराशा है

बूंद मात्र ही आस बची है – वो भी सूख जानी है

सारे गांव इकट्ठा हों – क्योंकि खेत नहीं मन प्यासा है

Leave a Reply

© 2010 BiharDays    
   · RSS · ·
Powered By Indic IME