बिहार पंचायत चुनाव में नेपाल सीमा पार से सस्ते में रेडियो द्वारा प्रचार: क्या आईडिया है , सर जी !
रत्नाकर त्रिपाठी
इस पार प्रिये मैं हूँ, तुम हो, उस पार...
बिहार के पंचायत चुनाव समाज के लिए एक दूरगामी समाधान है, ये तो सबको पता है. ये भी पता है कि चुनावी हिंसा चुनाव के पहले शुरू होकर आगे भी कुछ समय चलेगी तब फिर लोग परिणाम स्वीकार कर शांति से बैठेंगे. लेकिन बिहार पंचायत चुनाव ने एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा जो खड़ा कर दिया है , अब उसकी खबर ली जाये. चुनाव आयोग के अधिकारी भी इस पचड़े से पसीना पसीना हैं.
खबर ये है कि बिहार के पंचायती उम्मीद्द्वारों को चुनाव प्रचार का एक अद्भुत जरिया बड़े सस्ते रेट पर मिल गया है और चुनाव आयोग इस बात से एकदम परेशान है – बगल में नेपाल के राजदेवी एफ एम , जलेश्वरनाथ एफ एम, मधेशी रेडियो, रेडियो टुडे एवं जनकपुर रेडियो इत्यादि स्टेशन भारत स्थित रेडियो स्टेशनों से कहीं सस्ता रेट दे रहे हैं उम्मीदवारों को. और जन उम्मीदवार का काम सस्ते में और प्रभावशाली ढंग से बन रहा हो, तो वो क्यों बेमतलब बड़ा करे अपना चुनावी व्यय!
हालत ये है कि ये मामला अब कोई छिटपुट मामला नहीं रहा. सीमावर्ती सात जिलों में सौ से ऊपर उम्मीदवार
अपना प्रचार सीमा पर से करवा रहे हैं. अब चक्कर ये है कि इस खर्चे का हिसाब चुनाव आयोग कैसे लगावे? लेकिन इस से भी बड़ा चक्कर ये है कि सीमा पर से चुनावी प्रचार कहाँ तक कानूनी माना जा सकता है?
खैर, फिलहाल चुनाव आयोग इस गंभीर अंतर्राष्ट्रीय मामले को परे रख कर नेपाली रेडियो पर अपने कान लगाये हुए है और हिसाब चल रहा है कि किसने कितनी मुद्रा खर्ची – चाहे इधर हो या उधर!
