‘गया की गंजी पहाड़ियों को हरिहरा देना है‘: सिकंदर की तपस्या में हम भी कुछ कर सकते हैं क्या?

brahmayoni hills gaya
गया : पटना के एक अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के अनुसार गया के सिकंदर पिछले उनतीस वर्षों से वहां की ब्रह्मयोनि पहाड़ी पर पेड़ रोपने का काम करते आ रहे हैं. यह तपस्या उन्होंने सोलह वर्ष की आयु में शुरू की और इसमें अनवरत लगे रहे. उनका एक ही मकसद है - गया की गंजी पहाड़ियों को हरा भरा बना कर आबाद कर देना. सिकंदर को याद नहीं कि कि अब तक कितने पेड़ बोये पर उनके बोये 10000 पेड़ पहाड़ियों पर सलामत हैं - उन्हें अफ़सोस है उन पौधों का जिन्हें वो बचा नहीं पाए.
ये दिल हरा कर देने वाला किस्सा शुरू हुआ 1982 में और आज भी जारी है. क्या क्या पेड़ रोपे इस ग्रीन सिकंदर ने - आम, काजू, अमरुद, सुपारी, नीबू, अनार, और साथ में शीशम और गम्हार भी. इस पहाड़ी पर सिकंदर की बदौलत बरगद, अशोक और नीम के सायेदार पेड़ भी मौजूद हैं. जिन्होंने कभी पेड़ बोया होगा वो जानते हैं कि यह धीरज का काम है - क्रिकेट का तत्काल छक्का नहीं है , खेती समान भी नहीं है जहाँ चार महीने में काम का नतीजा दिख जाये, और वैसे भी पेड़ लगाना एक ऐसी खेती है जिसमे फसल काटना वर्जित है!

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1998 तक सिकंदर के पास एक कंपनी की नौकरी भी थी, बतौर बिजली मिस्त्री. पर जब ट्रान्सफर की बारी आयी तो सिकंदर ने अपने पेड़ भाइयों को चुना ना कि कंपनी को. नतीजा ये है कि आज वो मिस्त्रीगिरी से किसी तरह काम चलाते हैं.
जाहिर है जब मिस्त्रीगिरी की आमदनी से पेड़ों की देखभाल करनी है तो जुगाडू तकनीक और सायंस से ही काम चला होगा - सो सिकंदर गया के शमशानों से अधजले बांस खरीद कर पौधों के लिए बाड़े बनाते हैं ताकि आदमी और जानवर के पैर ना कुचलें पौधों को - फिर भी कुछ वृक्ष बन्धु गया के मौसम से हार मान लेते हैं.
अब सिकंदर पर्यावरण संरक्षण समिति नाम से एक न्यास [ट्रस्ट ] खोलने जा रहे हैं.
सवाल ये है कि क्या हम बिहारी आज, अभी, तत्काल ऐसे महान शख्सों को सपोर्ट देना कभी सीख पाएंगे या दशरथ माझी की तरह आज इन महात्माओं को पागल मान कर मृत्युपर्यंत उनकी पूजा करने का मौका ताकते रहेंगे?
और अंततः - क्या बात है गया की मिटटी में कि उसने दशरथ मांझी को भी पैदा किया, और सिकंदर को भी?
Really great work by Shikandar, we cannot pay him back by any mean. Government need to showcase this man to the society, so that people can think beyond their own comfort for the benefit of earth and envirnment.
Please help us to connect with Sikandar. We are planning a Green Gaya event on August 20 https://www.facebook.com/event.php?eid=153675624710125
Thanks