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एक ओर डाक्टरी शिक्षा और डिग्री : दूसरी ओर अभ्यास का महत्व : कुछ सुलझे कुतर्क

एक ओर डाक्टरी शिक्षा और डिग्री : दूसरी ओर अभ्यास का महत्व : कुछ सुलझे कुतर्क 

आचार्य   दंतनिपोरन

surgeon bihardays

पूर्णिया बिहार का एक ऐसा शहर है जहाँ बहुत सारे पथोलोजिस्ट पाए जाते हैं. ये सब के सब तरह तरह की जांचें एकदम धड़ल्ले से कर लेते हैं. इनमे से कई अल्ट्रा साउंड का भी धंधा करते हैं. कुछ तो मूड आये तो पेट भी चीर लेते हैं. सवाल ये है कि ये महारत सिर्फ पूर्णिया के लोगों में ही पाई जाती है, एक लोकल विशेषता है या समूचे बिहार में इस टाइप का जिनिअस फैला हुआ है?
खबरों की माने तो पूर्णिया में आज करीब सत्तर ऐसे  पथोलोजिस्ट हैं जिनको सम्बद्ध डिग्री इत्यादि है ही नहीं. इनमे कुछ डॉक्टरों ने इतिहास पढ़ा है, कुछ हिंदी साहित्य और कुछ करत करत अभ्यास वाले कंडीडेट हैं. हाल में एक अधिकारी ने जब इनकी लिस्ट बनाई तो कुल टोटल निकला – 70 , यानी ऐसे सत्तर क्लिनिक हैं इस शहर में जिन्हें गैर कानूनी करार  किया जा रहा है.
इसे पूर्णिया और बिहार की जनता एक स्वस्थ कदम मान रही है. पर सही देखें तो  यह घोर अन्याय है.
अगर आपको इस चोर डॉक्टर को पकड़ना था तो उसे शुरू में क्यों नहीं पकड़ा? वह आध एक साल जेल में बिता कर जीवन में कोई नया रास्ता खोजता, कहीं किसी स्कूल में भारत का इतिहास पढ़ा लेता.
अब आप कई दशक बाद उसके पीछे पड़े हैं. इसका नतीजा सोचा है आपने?
आज वह शहर में सम्मानित है.
आज अच्छे अच्छे डॉक्टर उसके टेस्ट रिजल्ट पर भरोसा कर अपनी पर्ची लिखते हैं.
आज वह सिर्फ इतिहास का डिग्री धारी नहीं रहा. उसका प्रेक्टिकल अनुभव एम बी बी एस से कहीं ज्यादा है चूंकी टेस्ट करते करते वह उस्ताद हो गया है.
उसपर रोगियों का कितना भरोसा है, आपने कभी सोचा है?
आप एक पूरे शहर का दिल तोड़ रहे हैं.
शुरुआत आपने पूर्णिया से की है. अब पता नहीं कहाँ कहाँ आगे विचरियेगा छापे मारते मारते. आप तो पूरे बिहार का दिल तोड़ दीजियेगा, दम तोड़ दीजियेगा.
और सबसे बड़ी बात – अगर इन समाज सेवियों को आप एकदम से उखाड़ फेकियेगा तो यह क्या करेंगे मजबूरी में? कहाँ जायेंगे इनके बिलखते परिवार?
आप इनके लिए जीवन में एक ही रास्ता छोड़ रहे हैं – अपराध.
नितीश बाबू अपराध रोकने में लगे हुए हैं, और आप हैं कि लोगों को ठेल ठेल कर उस दुश्मार्ग पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं.
अतः एक समाधान सुझाते हैं हम – इन सारे इतिहासकारों, साहित्यिकों और कवियों को बैठाइए एक कामन टेस्ट में – एक मेडिकल शिविर लगाइए मुफ्त इलाज के लिए और तब जाँचिये कि इनमे कौन सिध्हहस्त है और कौन बेकार. मुफ्त का है इसलिए आपरेशन असफल हुआ तो क्या हुआ?
इन सारे लोगों से दस दस टेस्ट अथवा आपरेशन करवाइए और दस में जो एक भी सही कर दिखाएँ उन्हें सर्टिफिकेट दे डालिए. दस में अगर एक ठीक काम हुआ तो भाई कुछ काम तो हुआ सही – शून्य नहीं है ना आदमी! बस हो गयी समस्या हल.
सबको निकाल दीजियेगा तो बिहार में रातों रात  डॉक्टर कहाँ से आएंगे? देश भर के इंटरनी यहाँ धमक आएंगे अपनी अपनी छुरी पिजाते पिजाते! तब बचाइएगा आप बिचारे बिहारी रोगी की जान!
समझे?

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2 Responses

  1. Now a days all the Govt has allowed pathological practice to diploma holders. The institute of that Diploma has mushroomed and standard of teaching is very poor as there is no check like MCI.Pathological Investigation is eye of a doctor and most important. Technician should be allowed only to practice under a doctor for cross checking. Seeing the acute Scarcity of Doctors they can’t be discouraged as well.

  2. If you don’t have a doctor it does not mean you can let everybody practice .The comment above coming from a doctor is quite surprising.By allowing them we are putting people lives in danger.about the government this government is not interested in well being of the people.There schemes have put the poor people’s lives in danger.I would like to mention we from our organisation had approached and said to the govt that the central govt scheme Rashtriya swasth bima yojna scheme was a good one but there were no systems to monitor the clinical quality of the hospitals and doctors who are giving service to the poor under RSBY.We had also indicated that many doctors giving service under RSBY are using inferior quality consumables for surgeries held for patient under RSBY and the government is giving a good amount of money to them for these treatments.Nobody actually were interested.

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